Wednesday, 18 Feb, 2026 10:08:00 AM

भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद

Indian Council of Forestry Research and Education

चल रही परियोजनाएँ

वन अनुसंधान संस्थान, देहरादून

1- यूकेलिप्टस गॉल वास्प, Leptocybe invasa का जैविक नियंत्रण।

2- Ginkgo biloba L. के प्रवर्धन एवं संरक्षण हेतु टिशू कल्चर प्रोटोकॉल का विकास।

3- भवन निर्माण में दीमक नियंत्रण हेतु Clothianidin 7.5 CS की प्रभावशीलता।

4- उत्तराखंड के आपदा प्रभावित क्षेत्रों में Melia composita wild. का वनीकरण।

5- पंजाब के होशियारपुर में लकड़ी उद्योगों एवं लघु स्तर की लकड़ी कारीगरी हेतु कॉमन फैसिलिटी सेंटर की स्थापना।

6- हिमालय के विभिन्न क्षेत्रों से एकत्रित Berbaris aristata DC की सक्रिय घटकों की रासायनिक विशेषताओं एवं कवकनाशी गुणों का मूल्यांकन।

7- Azadirachta indica में पॉलीप्लॉइड्स का प्रेरण, मूल्यांकन एवं विकास।

8- पॉपलर पत्तिभक्षी कीटों के प्रबंधन हेतु पौध आधारित कीटनाशकों का विकास, उत्तरी क्षेत्र में परीक्षण एवं किसानों के लिए जागरूकता कार्यक्रम का संचालन।

9- Polygonatum verticillatum Linn. की उत्पादकता, रासायनिक घटकों एवं कीटनाशी गुणों हेतु आनुवंशिक सुधार।

10- BCCL धनबाद द्वारा ओबी डंप/खनन क्षेत्रों (40.0 हे.) में किए जा रहे पारिस्थितिक पुनर्स्थापन कार्य हेतु तकनीकी सलाहकार/विशेषज्ञ के रूप में कार्य करना।

11- बायोमास अपशिष्ट अवशेषों से एंटीऑक्सीडेंट के मूल्य संवर्धन हेतु जैव-प्रौद्योगिकीय हस्तक्षेप।

12- उत्तराखंड में ऊँचाई एवं ऋतु का मृदा श्वसन, जीवाणु समुदाय एवं एंजाइम गतिविधियों पर प्रभाव।

13- एफआरआई देहरादून में वन आनुवंशिक संसाधनों पर उत्कृष्टता केंद्र हेतु CAMPA/NCAC सहायता।

14- अत्तर मूल्य श्रृंखला का उन्नयन, उन्नत उत्पादन तकनीक का विकास एवं गुणवत्ता नियंत्रण हेतु मानक विनिर्देश।

15- कार्य योजना में निर्धारित उत्पादन की तुलना में उत्तराखंड के वनों में वास्तविक उत्पादन के संदर्भ में हरे वृक्षों की कटाई पर प्रतिबंध के जैव-भौतिक प्रभाव का अध्ययन।

16- नवीकरणीय ऊर्जा एवं मूल्य संवर्धित उत्पादों हेतु केले के तने के रस का उपयोग।

17- पंजाब के कांडी क्षेत्र में आजीविका सुधार हेतु Lantana camara का प्रबंधन एवं उपयोग।

18- आवश्यक तेलों का जैव-अन्वेषण।

19- ग्वार गम एवं उसके उप-उत्पादों का मूल्य संवर्धन।

20- Habenaria edgeworthei Hook.F. ex collect एवं Habenaria intermedia D.Dun (महत्वपूर्ण अष्टवर्ग प्रजातियाँ) का फाइटोकेमिकल मूल्यांकन।

21- एनएमपीबी इंडिया द्वारा स्थापित औषधीय पौधा संरक्षण क्षेत्रों का आकलन।

22- समशीतोष्ण औषधीय पौधों के श्रेष्ठ जीनोटाइप्स की पहचान।

23- एआईसीपी, नई दिल्ली के अंतर्गत भारत के Tettigoniidae (Orthoptera) का वर्गिकी अध्ययन।

24- भारतीय वनों में जलवायु परिवर्तन संवेदनशीलता।

25- गुणवत्ता युक्त कागज उत्पादन हेतु शक्ति संवर्धक के रूप में कैटायोनिक सेल्यूलोज के उपयोग का अध्ययन।

26- उत्तराखंड में CAMPA के अंतर्गत वृक्षारोपण नर्सरी की निगरानी एवं मूल्यांकन तथा बीज गुणवत्ता का आकलन।

27- उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के कुछ उच्च मूल्य एवं संकटग्रस्त औषधीय पौधों की जनसंख्या जीवविज्ञान, विशेषता निर्धारण एवं संरक्षण पर अध्ययन।

28- जैव विविधता एवं अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण, विशेष रूप से औषधीय एवं सुगंधित पौधों के संदर्भ में वन संसाधनों के प्रति जागरूकता हेतु।

29- बूस्टर रिफ्लेक्टर युक्त ग्रीनहाउस प्रकार के सोलर टिम्बर ड्रायर में हाइब्रिड सोलर थर्मल ऊर्जा भंडारण प्रणाली का एकीकरण।

30- पंजाब वन विभाग को Melia dubia Cav. के आनुवंशिक रूप से उन्नत रोपण सामग्री की आपूर्ति।

31- Pistacia integerrima की सिसिडोलॉजी एवं नर्सरी स्थापना, इन-सीटू पत्ती गॉल उत्पादन की संभावना के अन्वेषण हेतु।

32- जैव-इथेनॉल हेतु लिग्नोसेल्यूलोसिक बायोमास के पूर्व-उपचार द्वारा रिड्यूसिंग शुगर का उत्पादन।

33- खाद्य मशरूम Astraeus hygrometricus का रासायनिक परीक्षण एवं मूल्य संवर्धन।

34- विभिन्न स्रोतों से बायोमास अध्ययनों का संकलन एवं उपलब्ध डेटा से BEF एवं R:S का विकास।

35- हाल के वर्षों में विभिन्न जलवायु चर के परिवर्तनीय रुझानों का आकलन करने हेतु न्यू फॉरेस्ट के जलवायु डेटा का विश्लेषण।

36- केम्पटी जलग्रहण क्षेत्र (मसूरी) के वनों द्वारा प्रदत्त जलवैज्ञानिक सेवाओं का आकलन।

37- उन्नत CO₂ परिस्थितियों में पौधों की अनुकूलन प्रतिक्रिया का अध्ययन।

38- पारंपरिक/पर्यावरण-अनुकूल संरक्षकों (ZIBOC) के साथ रोपण प्रजातियों की प्राकृतिक टिकाऊपन पर अध्ययन।

39- Melia composita के भौतिक एवं शक्ति गुणों के त्वरित मूल्यांकन हेतु निकट अवरक्त स्पेक्ट्रोस्कोपी का उपयोग।

40- फिंगर जॉइंटेड यूकेलिप्टस खंडों की झुकाव शक्ति पर विभिन्न चिपकने वाले पदार्थों का प्रभाव।

41- Melia composita Wild. के आनुवंशिक सुधार पर AICP।

42- यूकेलिप्टस के नव विकसित श्रेष्ठ हाइब्रिड/जीनोटाइप्स का क्लोनल प्रवर्धन एवं क्षेत्र में विकास।

43- Corymbia (Syn. Eucalyptus) हाइब्रिड C. citrodora Hook. × C. torelliana F.v. Muell की F1 एवं F2 पीढ़ियों से प्राप्त पुनर्संयोजकों का उच्च उत्पादकता हेतु क्षेत्रीय मूल्यांकन (अनुवर्ती अध्ययन)।

44- Dalbergia sissoo Roxb. में रूपात्मक एवं आणविक मार्करों के माध्यम से आनुवंशिक विविधता एवं अनुकूलनशीलता।

45- उत्तरी भारत में Ailanthus excelsa जर्मप्लाज्म का चयन एवं आनुवंशिक मूल्यांकन।

46- यूकेलिप्टस पौधों में रोग जैव-नियंत्रण एवं पौध वृद्धि संवर्धन हेतु Trichoderma spp. आधारित फॉर्मुलेशन का विकास एवं विस्तार।

47- Cassia tora बीजों का मूल्य संवर्धन एवं उपयोग।

48- उत्तराखंड के चीर पाइन एवं ओक वनों में आग के बाद मृदा गुणों एवं सूक्ष्मजीवों पर प्रभाव।

49- हस्तशिल्प हेतु महत्वपूर्ण बाँस प्रजातियों पर डीह्यूमिडिफायर किल्न एवं वैक्यूम किल्न का उपयोग कर सीज़निंग अध्ययन।

50- Chlorophorus annularis Fab. (Coleoptera: Cerambycidae) की महामारी विज्ञान एवं प्रबंधन – कटे एवं सूखे बाँस का प्रमुख छेदक।

51- पश्चिमी हिमालयी ओक वनों के कीट एवं उनका नियंत्रण।

52- भारतीय लकड़ी प्रजातियों पर घर्षण प्रेरित वेल्डिंग द्वारा जोड़ निर्माण हेतु अन्वेषणात्मक अध्ययन।

53- लकड़ी समिश्रण एवं फिंगर-जॉइंटेड ठोस लकड़ी में नैनो-फिलर्स की भूमिका पर अध्ययन।

54- प्राकृतिक रंगों के स्रोत के रूप में वन बायोमास का मूल्य संवर्धन एवं उपयोग।

55- प्लाईवुड निर्माण में चिपकने वाले पदार्थों के रेडियो फ्रीक्वेंसी क्योरिंग पर अध्ययन।

56- उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश की क्षरित भूमि पर Gmelina arborea एवं Emblica officinalis आधारित कृषि वानिकी मॉडल का विकास।

57- उत्तराखंड में वर्षा-आश्रित परिस्थितियों में किसानों की भूमि पर कचनार, भीमल एवं कदंब आधारित कृषि वानिकी मॉडल का विकास।

58- उत्तर-पश्चिम हिमालय की संकटग्रस्त औषधीय वृक्ष प्रजाति Litsea glutinosa का संरक्षण।

59- संरक्षक के अवशोषण में सुधार हेतु माइक्रोवेव तकनीक द्वारा कठिन उपचार योग्य लकड़ियों का संशोधन।

60- पूर्वी उत्तर प्रदेश के कृषि-जलवायु क्षेत्रों में लवणीय प्रभावित भूमि के पुनर्वास हेतु देशी वृक्ष प्रजातियों का मूल्यांकन।

61- गैर-विनाशकारी तकनीक द्वारा वृक्षों में क्षय का आकलन।

62- उत्तराखंड में विभिन्न वन प्रकारों/उप-प्रकारों से संबद्ध तितलियाँ।

63- उत्तराखंड एवं हरियाणा से Apanteles spp. (Hymenoptera: Braconidae) लार्वल परजीवियों की वर्गिकी एवं होस्ट रेंज पर अध्ययन।

64- यूकेलिप्टस में जलभराव एवं लवणता हेतु जर्मप्लाज्म मूल्यांकन एवं ट्रांसक्रिप्टोम अध्ययन।

65- उत्तर-पश्चिम हिमालय की पर्वतीय बाँस प्रजातियों (रिंगाल) का संरक्षण एवं आनुवंशिक सुधार हेतु विशेषता निर्धारण।

66- Dendrocalamus strictus में राइजोम वृद्धि एवं विकास का आणविक तंत्र।

67- तापीय ऊर्जा भंडारण प्रणाली के साथ सौर-उष्मित वैक्यूम ड्रायर का विकास।

68- Osyris quadripartita Salzm. ex Decne. के फाइटोकेमिकल संघटन पर अध्ययन।

69- Pinus roxburghii की सुइयों के मोम एवं अन्य निष्कर्षण का जैव-अन्वेषण।

70- Cyperus scariosus एवं Zanthoxylum armatum से प्राप्त आवश्यक तेल की गुणवत्ता सुधार हेतु एंजाइमेटिक हस्तक्षेप।

71- प्रोटोटाइप कूलिंग टॉवर में पारंपरिक (CCA, CCB) एवं पर्यावरण-सुरक्षित (ZiBOC) संरक्षकों से उपचारित आयातित लकड़ियों का प्रदर्शन मूल्यांकन।

72- कार्यात्मक खाद्य के स्रोत के रूप में चयनित जंगली खाद्य पौधों का पोषण एवं गुणवत्ता मूल्यांकन।

73- उत्तराखंड की चयनित औषधीय पौध प्रजातियों का आणविक चरित्रांकन।

74- वन अनुसंधान संस्थान की राष्ट्रीय वन कीट संग्रह (NFIC) का डिजिटलीकरण एवं समृद्धिकरण – चरण II (सूक्ष्म कीट)।

75- उत्तराखंड में विभिन्न वन आवरणों के अंतर्गत मृदा से कार्बन पृथक्करण एवं कार्बन भंडार का आकलन।

76- Grevillea robusta A. Cunn (सिल्वर ओक) की संरचनात्मक गतिकी एवं आनुवंशिक सुधार का अध्ययन।

77- पॉपलर पत्ती भक्षक कीट Clostera cupreata के प्रति सहनशीलता हेतु पॉपलर क्लोनों की स्क्रीनिंग।

78- रोगजनक तनाव के अंतर्गत Cymbopogon winterianus में मेवलोनेट (MVA) मार्ग एवं मिथाइल एरिथ्रिटोल 4-फॉस्फेट (MEP) मार्ग के ट्रांसक्रिप्ट की अभिव्यक्ति प्रोफाइलिंग।



उष्णकटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर

आईसीएफआरई द्वारा वित्तपोषित परियोजनाएँ

1- मध्य प्रदेश में Gmelina आधारित कृषि वानिकी प्रणाली का विकास।

2- देश के विभिन्न क्षेत्रों के लिए चयनित वृक्ष चारा प्रजातियों की गुणवत्ता में सुधार: उनके रोपण एवं प्रबंधन हेतु मानकीकृत प्रोटोकॉल का विकास, विशेष रूप से वन सीमावर्ती गांवों पर ध्यान केंद्रित करते हुए। (अखिल भारतीय समन्वित परियोजना)

3- चयन सह सुधार कटाई प्रणाली के अंतर्गत कैनोपी खुलने की प्रतिक्रिया में वन समुदायों की जैव विविधता, पुनर्जनन एवं जीवन इतिहास फीडबैक।

4- मध्य प्रदेश के उष्णकटिबंधीय वनों में Pterocarpus marsupium की जनसंख्या गतिकी, संरचना एवं आनुवंशिक विविधता।

5- धान आधारित कृषि वानिकी प्रणाली के कीटों के विरुद्ध मकड़ी की जैव-नियंत्रण प्रभावशीलता का निर्धारण।

6- मध्य प्रदेश की प्रमुख वन वृक्ष प्रजातियों में वार्षिक मौसमीय उतार-चढ़ाव के संदर्भ में पौधा-जल संबंधों की समझ।

7- प्रमुख कीट लार्वा पत्तिभक्षियों के विरुद्ध जैव-कीटनाशकों, आइवरमेक्टिन एवं स्पिनोसैड का क्षेत्रीय मूल्यांकन।

8- ओडिशा के मैंग्रोव पारितंत्रों की कीट जीव-जंतु एवं वनस्पति का प्रलेखन।

9- मध्य प्रदेश एवं महाराष्ट्र में Albizia एवं Dalbergia के वृक्षारोपण हेतु समेकित कीट एवं रोग नियंत्रण प्रणाली का विकास।

10- प्रमुख कीटों (वन प्रजातियों के) के विरुद्ध जैविक नियंत्रण एजेंट के रूप में Canthecona furcellata के क्षेत्रीय अनुप्रयोग हेतु वितरण प्रणाली का विकास।

11- मध्य भारत के वन कवकों की जैव विविधता का प्रलेखन।

12- "सागौन के आनुवंशिक सुधार हेतु अखिल भारतीय समन्वित कार्यक्रम" – चार उप-परियोजनाओं के रूप में: उप-परियोजना: (i) प्लस वृक्षों का चयन, उनकी संतति परीक्षण एवं जर्मप्लाज्म बैंक की स्थापना (TFRI, जबलपुर)। उप-परियोजना: (ii) सागौन बीज उत्पादन क्षेत्रों, पौध बीज उद्यानों एवं क्लोनल बीज उद्यानों के प्रबंधन अभ्यासों का विकास (TFRI एवं SFRI, जबलपुर)। उप-परियोजना: (iii) पत्तिभक्षी कीटों के प्रति सहनशील ट्रांसजेनिक सागौन का उत्पादन (TFRI, जबलपुर)। उप-परियोजना: (iv) सागौन की जनसंख्या संरचना, लिंकेज असंतुलन एवं मार्कर-लक्षण संघ मानचित्रण पर अध्ययन (FRI एवं TFRI, जबलपुर)।

13- Tectona grandis की संतति परीक्षणों का मूल्यांकन एवं पत्तिभक्षी एवं लीफ स्केलेटनाइज़र प्रतिरोधी उन्नत रोपण सामग्री का उत्पादन।

14- Dalbergia latifolia Roxb. में आकस्मिक जड़ निर्माण में सुधार एवं जड़युक्त पौधों के क्षेत्रीय प्रदर्शन पर अध्ययन।

15- वन प्रजातियों Acacia concinna, Sapindus laurifolius एवं Ziziphus mauritiana से प्राप्त फाइटोकेमिकल्स का खाद्य उत्पादों से रासायनिक अवशेष हटाने हेतु मूल्यांकन।

16- पाँच महत्वपूर्ण उष्णकटिबंधीय प्रजातियों—Adina cordifolia, Mitragyna parviflora, Lannea coromandelica, Ougeinia oojeinensis एवं Anogeissus acuminata—के बीजों की परिपक्वता एवं जीवनीयता पर अध्ययन, प्रभावी संग्रह एवं बीज भंडारण हेतु।

17- मध्य भारत की चार संकटग्रस्त/दुर्लभ प्रजातियों के प्राकृतिक पुनर्जनन की बहाली हेतु बीज अंकुरण एवं पौध जीवितता की पारिस्थितिक शरीरक्रिया पर अध्ययन।

18- विभिन्न कारकों के संदर्भ में महाराष्ट्र के वनों हेतु पूर्वानुमानात्मक अग्नि मॉडल का विकास एवं उपयुक्त रणनीतियों का निर्धारण।

19- रिमोट सेंसिंग एवं GIS तकनीकों का उपयोग करते हुए बुंदेलखंड में निर्मित जल संचयन संरचनाओं का मृदा नमी/वनस्पति पर प्रभाव का आकलन।

बाह्य रूप से वित्तपोषित परियोजनाएँ

1- मध्य प्रदेश में लाख की खेती के माध्यम से जनजातीय समुदाय को सशक्त बनाना।

2- मध्य प्रदेश के सतपुड़ा पठार कृषि-जलवायु क्षेत्र में फाइटो-विविधता का उपयोगकर्ता-अनुकूल डाटाबेस तैयार करना।

3- मध्य प्रदेश में प्रमुख वन पौध प्रजातियों हेतु वृक्षारोपण तकनीकों का मानकीकरण।

4- छत्तीसगढ़ के MPCA में पुष्पीय विविधता का पारिस्थितिक आकलन, विशेष रूप से औषधीय महत्व एवं संरक्षण प्राथमिकता वाली प्रजातियों पर बल देते हुए।

5- TFRI, जबलपुर (म.प्र.) में Arachnarium की स्थापना।

6- ओडिशा के राउरकेला स्टील प्लांट में वृक्षारोपण द्वारा कार्बन पृथक्करण।

7- महाराष्ट्र में Diospyros melanoxylon झाड़ियों की छंटाई का उपज, गुणवत्ता एवं वृक्ष प्रजातियों के प्राकृतिक पुनर्जनन पर प्रभाव का आकलन।

8- मध्य प्रदेश में सागौन पौधों को क्षति पहुँचाने वाली प्रमुख व्हाइट ग्रब प्रजातियों का वितरण, क्षेत्रीय जीवविज्ञान एवं समेकित कीट प्रबंधन।

9- भारत के Tettigoniidae (Orthoptera) का वर्गिकी अध्ययन (अखिल भारतीय समन्वित वर्गिकी परियोजना – AICOPTAX के अंतर्गत)।

10- छेदक प्रभावित क्षेत्रों में साल (Sal) के पुनर्जनन का अध्ययन।

11- मध्य प्रदेश के वन पारितंत्र में लाभकारी कीटों की विविधता पर अध्ययन।

12- Pterocarpus marsupium Roxb. का जर्मप्लाज्म संग्रह एवं एक्स-सीटू संरक्षण।

13- बाँस का आनुवंशिक मूल्यांकन, सुधार एवं प्रवर्धन।

14- बाँस प्रजातियों की गुणवत्ता युक्त रोपण सामग्री का व्यावसायिक उत्पादन।

15- महत्वपूर्ण वानिकी प्रजातियों जैसे Buchanania lanzan, Madhuca indica एवं Tamarindus indica हेतु टिशू कल्चर प्रोटोकॉल का विकास।

16- राष्ट्रीय सागौन जर्मप्लाज्म बैंक, चंद्रपुर (महाराष्ट्र) में संरक्षित सागौन (Tectona grandis L.f.) के CPTs में आनुवंशिक संरचना, लिंकेज असंतुलन एवं मार्कर-लकड़ी गुण संघ का आणविक मार्करों द्वारा आकलन।

17- Commiphora wightii ओलियो-गम रेज़िन की गैर-विनाशकारी कटाई पद्धतियों का मानकीकरण।

18- मैक्रोस्केल हाइड्रोलॉजिकल मॉडल का उपयोग करते हुए नर्मदा नदी बेसिन में वन आवरण परिवर्तन का जल प्रवाह विनियमन पर प्रभाव।



शुष्क वन अनुसंधान संस्थान, जोधपुर

1- भारत की क्षरित भूमि पर सिल्वी-पास्टोरल प्रणाली के माध्यम से चारा उत्पादकता में वृद्धि। (AFRI-02/NWFP/Int (ICFRE)AICP/2012-2018)।

2- राजस्थान के सिरोही जिले के जनजातीय क्षेत्र में आजीविका के अवसरों को बढ़ाने हेतु NTFP का परिमाणीकरण, मूल्य संवर्धन एवं कृषि उत्पादकता में सुधार। (AFRI-03/NWFP/Int(ICFRE)AICP/2012-2018)।

3- Anogeissus pendula के बीज अंकुरण एवं नर्सरी तकनीक पर अध्ययन। (AFRI-22/Silvi/ICFRE/2016-19)

4- जैव उर्वरक (AM फंगी) के उपयोग से लवणीय प्रभावित मृदा का पुनर्वास। (AFRI-23/AF&E/ICFRE/2016-19)

5- राजस्थान की नर्सरियों में महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों का समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन (IPDM)। (AFRI-24/FP/ICFRE/2016-21)

6- Dendrocalamus strictus एवं Bambusa bambos की उत्पादकता वृद्धि हेतु प्रभावी AM फंगी, PSBs एवं Azospirillum का चयन। (AFRI-25/FP/ICFRE/2016-20)

7- गुजरात एवं राजस्थान में चंदन (Santalum album) की खेती को बढ़ावा देने हेतु मौजूदा वृक्षारोपणों का मूल्यांकन, कृषि वानिकी परीक्षणों की स्थापना एवं क्षमता निर्माण। (AFRI-40/Silvi/ICFRE/2017-20)

8- गुजरात राज्य में Casuarina प्रजातियों के बहु-उपयोग हेतु बहु-स्थानीय क्लोनल परीक्षण। (AFRI-41/Silvi/ICFRE/2017-22)

9- Prosopis cineraria (L.) Druce में पुष्प गॉल उत्प्रेरकों के विरुद्ध समेकित प्रबंधन रणनीति का विकास। (AFRI-37/FP/ICFRE/2017-2022)

10- राजस्थान के शुष्क क्षेत्र में Acacia senegal आधारित पारंपरिक कृषि वानिकी प्रणाली में फसल उपज, मृदा उर्वरता एवं गोंद उत्पादन पर अध्ययन। (AFRI-42/AF&E/ICFRE/2017-22)

11- इंदिरा गांधी नहर परियोजना (IGNP) की नहर किनारे वृक्षारोपणों में कटाई का मृदा पोषक तत्वों एवं कार्बन भंडार पर प्रभाव। (AFRI-43/FE/ICFRE/2017-2022)

12- शुष्क एवं अर्ध-शुष्क राजस्थान में चयनित अल्प-उपयोगी NTFPs के मूल्य संवर्धन द्वारा VFPCs/SHGs की क्षमता वृद्धि, ताकि आजीविका के अवसर बढ़ाए जा सकें। (AFRI-44/NWFP/ICFRE/2017-2020)

13- राजस्थान में Acacia senegal, Capparis decidua एवं Prosopis cineraria में परागणकर्ताओं की विविधता एवं फल/फली उत्पादन में उनकी भूमिका। (AFRI-26/FP/ICFRE/2016-19)

14- उच्च बायोमास उत्पादन हेतु Ailanthus excelsa वृक्षों में नर एवं मादा की पहचान के लिए DNA मार्करों की स्क्रीनिंग। (AFRI-28/FGTB/ICFRE/2016-19)

15- आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण बाँस Schizostachym dullooa हेतु टिशू कल्चर प्रोटोकॉल का विकास। (AFRI-29/FGTB/ICFRE/2016-21)

16- सह-अभिव्यक्ति नेटवर्क विश्लेषण एवं तुलनात्मक जीनोमिक्स का उपयोग कर अजैविक तनाव सहनशील उम्मीदवार जीनों की इन-सिलिको पहचान। (AFRI-30/FGTB/ICFRE/2016-18)

17- कुछ महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों में जड़ बनने की क्षमता सुधार हेतु किशोरावस्था सूचकों की पहचान। (AFRI-31/FGTB/ICFRE/2016-20)

18- ठंड सहनशीलता में वृद्धि हेतु ट्रांसजीन पिरामिडिंग द्वारा Azadirachta indica (नीम) का आनुवंशिक सुधार। (AFRI-39/FGTB/ICFRE/2017-22)

19- देशज दलहनी पौधों से Rhizobium की पौध वृद्धि संवर्धक (PGP) गतिविधि का मूल्यांकन एवं अन्य PGP राइजोबैक्टीरिया के साथ कंसोर्टियम का विकास। (AFRI-38/FP/ICFRE/2017-22)

20- Tecomella undulata की फेनोलॉजी, आणविक विश्लेषण एवं लकड़ी गुणों पर अध्ययन, तीन पुष्प रंग रूपों के संदर्भ में। (AFRI-45/FGTB/ICFRE/2017-2020).

बाह्य सहायता प्राप्त चल रही परियोजनाएँ

21- ‘थार मरुस्थल’ के ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका सृजन हेतु कैर (Capparis decidua) की उत्पादकता में वृद्धि। (AFRI-07/NWFP/Ext(SFD:Raj)2013-18).

22- Commiphora wightii के गोंद ओलियोरेज़िन की गैर-विनाशकारी कटाई पद्धति का मानकीकरण। (AFRI-01/NWFP/Ext(NMPB)/2014-17)

23- हस्तशिल्प उद्योगों हेतु वैकल्पिक काष्ठ प्रजातियों के रूप में Azadirachta indica एवं Acacia senegal की कटाई-पश्चात तकनीकों पर अध्ययन। (AFRI-14/NWFP/Ext.(DST)/2014-17)।

24- पश्चिमी राजस्थान में बेहतर उपयोग हेतु Prosopis cineraria एवं Capparis decidua फलों के प्रसंस्करण तरीकों का अनुकूलन। (AFRI-15/NWFP/Ext(DST)/2014-17)।

25- राजस्थान एवं गुजरात में ग्रामीण आजीविका के सामाजिक-आर्थिक उत्थान में नीम उत्पादों की भूमिका का प्रलेखन। (AFRI-16/NWFP/Ext(DST)/2014-17)।

26- राजस्थान में वृक्षों का मृदा उर्वरता एवं फसल उत्पादन पर प्रभाव का अध्ययन। (AFRI-33/AF&ED/SFD(Raj.)/2016-2019

27- जैव उर्वरकों के माध्यम से नीम (Azadirachta indica) की रोपण सामग्री में सुधार तथा कीट एवं रोगों के समेकित प्रबंधन (IPDM) हेतु पैकेज का विकास। (AFRI-12/FP/Ext(DST)/2014-17)।

28- अपशिष्ट निपटान के दौरान उत्पादकता वृद्धि हेतु मृदा का फाइटोरिमेडिएशन। (AFRI-113/FED/SFD-Raj/2011-18)।

29- जड़ फंगल एंडोफाइट एवं नाइट्रोजन स्थिरीकरण प्रोकैरियोट (Azotobacter spp.) के कंसोर्टियम के उपयोग से कृषि एवं उद्यानिकी महत्व के पौधों का मूल्य संवर्धन। (AFRI-19/FP/EXT(DST)/2015-17)

30- Azadirachta indica में पॉलीप्लॉइड्स का प्रेरण, मूल्यांकन एवं विकास। (AFRI-20/Sil./Ext.(IFFCO)/2015-2018)।

31- दुर्लभ एवं संकटग्रस्त औषधीय पौधा Commiphora wightii (Arnott) के बीज उत्पादन क्षेत्र एवं हैप्लॉइड पौधों का विकास। (AFRI-35/FGTB/Ext(NMPB)/2016-19)।

32- Leptadenia auriculata (एक संकटग्रस्त औषधीय पौधा) का क्लोनल प्रवर्धन, विशेषता निर्धारण एवं जैवरासायनिक विश्लेषण। (AFRI-36/FGTB/Ext(NMPB)/2016-19)।

33- बायोरिएक्टर का उपयोग कर Commiphora wightii (गुग्गुल) से गुग्गुलस्टेरोन्स युक्त औषधीय सक्रिय प्राकृतिक निष्कर्ष का गैर-विनाशकारी इन-विट्रो उत्पादन—एक शक्तिशाली हृदय-संरक्षक एवं कैंसर-रोधी औषधि। (AFRI-46/FGTB/Ext(NMPB)/2017-2020)

34- पश्चिमी राजस्थान में जलवायु परिवर्तन की शमन एवं अनुकूलन रणनीतियों हेतु MPOWER कार्यक्रम के प्रभावों पर अध्ययन (चरण II)। (AFRI-17/FED/Ext(MPOWER)/2016-17)

35- जोधपुर जिले के सामुदायिक आरक्षित क्षेत्रों में विकासात्मक योजना एवं जागरूकता सृजन हेतु जैविक विविधता एवं जन-धारणा का आकलन।



बाँस एवं रैटन के लिए उन्नत अनुसंधान केंद्र, बेथलेहम वेंगथलांग, आइजोल, मिजोरम

वर्तमान में ICFRE द्वारा वित्तपोषित निम्नलिखित अनुसंधान परियोजनाएँ संचालित की जा रही हैं:

1. मिजोरम में आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों की नर्सरी रोगों पर अध्ययन एवं उनका प्रबंधन।

2. मिजोरम, उत्तर-पूर्वी भारत में लाइकेन विविधता का आकलन, प्रलेखन एवं विशेषता निर्धारण।

3. त्रिपुरा, उत्तर-पूर्वी भारत की लाइकेन विविधता का आकलन, प्रलेखन एवं विशेषता निर्धारण।

4. मिजोरम की दुर्लभ एवं संकटग्रस्त ऑर्किड प्रजातियों का सूक्ष्म-प्रवर्धन तथा उनका प्राकृतिक आवास में पुनःस्थापन।

5. ICFRE-ICIMOD का सहयोगी प्रोजेक्ट शीर्षक “REDD+ हिमालय: हिमालय क्षेत्र में REDD+ के कार्यान्वयन में अनुभव का विकास एवं उपयोग।”

6. उत्तर-पूर्वी भारत के बाँस आनुवंशिक संसाधनों के संरक्षण एवं मूल्यांकन पर समन्वित अनुसंधान परियोजना।

7. अगर (Aquilaria malaccensis Lamk.) पर समन्वित अनुसंधान कार्यक्रम।



वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान, कोयंबटूर

एनएफआरपी परियोजनाएँ

1- उन्नत CO₂ परिस्थितियों में कार्बन अवशोषण क्षमता में अंतःप्रजातीय भिन्नता के लिए वृक्ष प्रजातियों की स्क्रीनिंग

2- यूकेलिप्टस में उच्च उत्पादकता हेतु द्वितीय पीढ़ी के बीज उद्यानों की स्थापना एवं क्लोनों का चयन

3- औद्योगिक बायोमास उत्पादकता के लिए Leucaena leucocephala (Lam.) de Wit का जर्मप्लाज्म संकलन एवं सुधार

4- उत्पादकता एवं लकड़ी के गुणों के लिए यूकेलिप्टस के अंतःप्रजातीय संकर क्लोनों का मूल्यांकन

5- कीट-विशिष्ट dsRNA की अभिव्यक्ति के माध्यम से Leptocybe invasa Fisher & La Salle (Hymenoptera: Eulophidae) के प्रति यूकेलिप्टस में प्रतिरोध का समावेशन

6- यूकेलिप्टस बीज उद्यानों के प्रबंधन हेतु आनुवंशिक विविधता का आकलन

7- वृक्ष कृषि में उत्पादकता बढ़ाने हेतु तमिलनाडु एवं केरल में Melia dubia के आनुवंशिक संसाधनों का मूल्यांकन

8- Pterocarpus प्रजातियों का डीएनए बारकोडिंग

9- वन आनुवंशिक संसाधनों की खोज, संग्रह एवं मूल्यांकन तथा राष्ट्रीय जीन बैंक का विकास

10- तमिलनाडु के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में सामान्यतः उगाई जाने वाली बाँस प्रजातियों पर उत्पादकता अध्ययन

11- तमिलनाडु के अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में कृषि भूमि में जल उपयोग दक्षता, फसल उत्पादकता एवं जलवायु परिवर्तन सहनशीलता बढ़ाने हेतु पवनरोधकों का मूल्यांकन

12- ToF (वनों के बाहर के वृक्ष) प्रजातियों के रोपित पौधों के कीट एवं उनका प्रबंधन

13- Ailanthus excelsa – वैकल्पिक प्रोटीन स्रोत के रूप में: पोषण मूल्य एवं अन्य द्वितीयक यौगिकों के गुणात्मक आकलन के संदर्भ में चारे की संभावनाएँ

14- पश्चिमी घाट की शोला वनों में Acacia mearnsii के आक्रमण का मृदा उर्वरता स्थिति पर प्रभाव

15- जैव-रंगकार: वस्त्र/खाद्य पदार्थों में पर्यावरण-अनुकूल एवं सुरक्षात्मक प्राकृतिक रंग के रूप में लाल इमली के चयनित अभिग्रहों का जैव-अन्वेषण

16- अंतः एवं अंतःप्रजातीय संकरण के माध्यम से Casuarina का वृद्धि एवं पल्प उपज हेतु आनुवंशिक सुधार

17- Acacia mangium की नई उत्पत्ति (Provenances) का परीक्षण तथा प्रथम एवं द्वितीय पीढ़ी के बीज उद्यानों से आनुवंशिक लाभ का आकलन

18- Casuarina equisetifolia में Cinnomoyl CoA Reductase जीन का पृथक्करण एवं विशेषता निर्धारण

19- लवणता सहनशीलता हेतु यूकेलिप्टस की बहु-अभिभावक अंतःसंकरण आबादी का उत्पादन

20- यूकेलिप्टस में शीघ्र पुष्पन प्रेरण हेतु रणनीतियाँ

21- तेल उपज एवं स्थल-विशिष्टता के लिए Calophyllum inophyllum क्लोनों का आकलन

22- व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों के लिए बीज पेलेटिंग तकनीकों का विकास

23- केरल एवं तमिलनाडु में Neolamarckia cadamba का मूल्यांकन एवं लोकप्रियकरण

24- उच्च उत्पादकता हेतु द्वितीय पीढ़ी के Eucalyptus camaldulensis क्लोनों का मूल्यांकन

25- उच्च उत्पादकता हेतु Swietenia macrophylla का आनुवंशिक सुधार

26- Casuarina बीज कीटों की जीवविज्ञान, पारिस्थितिकी एवं प्रबंधन

27- तमिलनाडु में उत्पादकता सुधार हेतु Acacia nilotica L. के जर्मप्लाज्म का चयन एवं स्क्रीनिंग

28- तमिलनाडु के शोला घासभूमि पारिस्थितिकी तंत्र के सतत प्रबंधन हेतु वॉटल आक्रमण का स्थानिक मानचित्रण एवं मॉडलिंग

29- उच्च फल उत्पादकता हेतु Tamarindus indica L. के आशाजनक क्लोनों का मूल्यांकन

30- Dalbergia प्रजातियों का जर्मप्लाज्म संकलन, उसका विशेषता निर्धारण एवं मूल्यांकन

31- वानिकी उपयोग हेतु Simarouba glauca DC के बीज तेल से जैव-कीटनाशी फॉर्मूलेशन का विकास

32- Pterocarpus santalinus L. के रोपण स्टॉक में सुधार हेतु Arbuscular मायकोराइज़ल फफूँद एवं Rhizobium के श्रेष्ठ उपभेदों की पहचान

33- तमिलनाडु के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में Casuarina मृत्यु दर पर अध्ययन एवं सहनशील सामग्री की पहचान सहित उपयुक्त प्रबंधन उपायों का विकास

34- चारा सुरक्षा की दिशा में पारंपरिक 'कोरंगाडु' सिल्वी-पशुपालन प्रणाली में Acacia leucophloea के वृक्ष आनुवंशिक संसाधनों का संरक्षण एवं कृषि-वानिकी हस्तक्षेप

35- उद्योगों के लिए वृक्ष: किसानों को वेनियर एवं पल्प वृक्ष फसल के रूप में E. tereticornis × E. grandis चयन का तैनाती, प्रदर्शन एवं विमोचन

36- Thespesia populnea का आनुवंशिक सुधार

बाह्य रूप से वित्तपोषित परियोजनाएँ

1- सतत संरक्षण रणनीतियों एवं संसाधन प्रबंधन के विकास हेतु सागौन की जनसंख्या जनांकिकी एवं आनुवंशिक संरचना का प्रलेखन

2- Dasamoola की वृक्ष प्रजातियों से हेयरी रूट कल्चर के माध्यम से द्वितीयक उपचयों का इन-विट्रो उत्पादन

3- ऊतक संवर्धन प्रयोगशाला में बाँस के लिए प्रोटोकॉल माध्यम का मानकीकरण

4- यूकेलिप्टस की अंतःप्रजातीय संकरों में लकड़ी गुण लक्षणों का बहु-पर्यावरणीय गैर-विनाशकारी फीनोटाइपिंग

5- फीनोमिक्स सुविधा की स्थापना एवं लक्षण-आधारित प्रजनन कार्यक्रम हेतु जल तनाव सहनशील यूकेलिप्टस क्लोनों की स्क्रीनिंग

6- कर्नाटक में Gmelina arborea Roxb. के आनुवंशिक संसाधनों का जर्मप्लाज्म संकलन

7- स्वदेशी वन वृक्ष प्रजातियों (Tectona grandis एवं Melia dubia) के लिए वर्णनकर्ताओं एवं DUS परीक्षण दिशानिर्देशों का विकास तथा फील्ड जीन बैंक की स्थापना

8- कृषि वानिकी रोपणों से पल्पवुड उत्पादन बढ़ाने हेतु Casuarina एवं Leucaena का त्वरित सुधार

9- तमिलनाडु में उत्पादकता एवं ग्रामीण आजीविका बढ़ाने हेतु Casuarina equisetifolia के अंतरराष्ट्रीय जर्मप्लाज्म की स्क्रीनिंग

10- तमिलनाडु के विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में Ailanthus excelsa का क्लोनल मूल्यांकन

11- वृद्धि, स्वरूप एवं लकड़ी गुणों हेतु Gmelina arborea क्लोनों का चयन एवं बहु-स्थलीय परीक्षण

12- कर्नाटक की संभावित TBO प्रजाति Calophyllum inophyllum का संरक्षण एवं सुधार

13- वृक्ष-बाह्य-वन (TOFs) क्षेत्रों में ग्रामीण आजीविका संवर्धन हेतु Swietenia mahogani का सुधार एवं लोकप्रियकरण – Meliaceae की एक संभावित लकड़ी उत्पादक प्रजाति

14- पत्तीभक्षकों के विरुद्ध Semecarpus anacardium की कीटनाशी क्षमता एवं जैविक सक्रियता

15- तमिलनाडु के कोल्ली पहाड़ियों में विभिन्न वन एवं कृषि पारिस्थितिक तंत्रों में संभावित लाभकारी सूक्ष्मजीवों की खोज तथा नर्सरी एवं क्षेत्र में जैव-उर्वरक उत्पादन एवं उपयोग पर प्रशिक्षण-सह-प्रदर्शन

16- औषधीय पौधों पर कीट समुच्चय एवं उनकी सक्रिय औषधीय घटकों पर कीट क्षति का प्रभाव

17- S. oblonga एवं H. indicus के महत्वपूर्ण औषधीय पौधों की उत्पादकता एवं जड़ बनने की क्षमता में वृद्धि

18- तमिलनाडु में नहर तटबंधों एवं गृहस्थानों में उगाए गए सागौन हेतु बीज स्रोत मिलान एवं सुधार

19- वैश्विक स्तर पर निकट संकटग्रस्त रेड लिस्टेड मैंग्रोव Ceriops decandra में पुनर्स्थापन एवं प्रजाति पुनर्प्राप्ति पर अध्ययन

20- यूकेलिप्टस एवं Casuarina के लिए DUS केंद्र

21- यूकेलिप्टस में लिंकिज एवं QTL मैपिंग हेतु प्रत्याशी जीन-आधारित डीएनए मार्करों का विकास

22- Red Sanders (Pterocarpus santalinus L. f) एवं भारतीय चंदन (Santalum album L.) के लिए DUS वर्णनकर्ताओं का विकास तथा इन प्रजातियों से संबंधित स्वदेशी (पारंपरिक) ज्ञान का प्रलेखन

23- बड़े पैमाने पर गुणन एवं वृहत रोपण हेतु Red Sanders (Pterocarpus santalinus L.) के श्रेष्ठ क्लोनों का चयन एवं शाकीय प्रवर्धन

24- Ailanthus excelsa Roxb. के लिए वर्णनकर्ताओं एवं DUS परीक्षण दिशानिर्देशों का विकास तथा जीन बैंक की स्थापना

25- पूर्वी घाट की व्यापारिक वृक्ष प्रजातियों के लिए संरक्षण एवं पुनर्स्थापन रणनीतियाँ

26- नर्सरी एवं क्षेत्र में चंदन बीजों के प्रदर्शन का आकलन: पेलेटाइज्ड, गैर-पेलेटाइज्ड एवं रोपित पौधों का तुलनात्मक प्रदर्शन अध्ययन

27- कृषि एवं वानिकी महत्व के कीटों के प्रबंधन हेतु Hydnocarpus pentandra के बीज अर्क से सर्वाधिक प्रभावी जैव-कीटनाशी फॉर्मूलेशन का पंजीकरण एवं व्यावसायीकरण

28- तमिलनाडु के Orthoptera का वर्गिकी अध्ययन

29- कोयंबटूर, तमिलनाडु के वन-सीमावर्ती गाँवों में इरुलर जनजातियों को बायोबूस्टर उत्पाद/प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण: आजीविका समर्थन का एक वैकल्पिक स्रोत

30- भारत में Tettigoniidae के वर्गिकी अध्ययन पर AICOPTAX परियोजना

31- साइलेंट वैली बफर ज़ोन की पादप जैव-विविधता का आकलन

32- बड़े पैमाने पर रोपण हेतु स्थल-विशिष्ट क्लोनों की पहचान के लिए बहु-स्थलीय परीक्षण द्वारा सागौन के चयनित क्लोनों का मूल्यांकन

33- उत्पादकता वृद्धि हेतु सागौन एवं अन्य महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों के आनुवंशिक संसाधनों का चयन, मूल्यांकन, संरक्षण एवं प्रलेखन



वर्षा वन अनुसंधान संस्थान, जोरहाट

1- मेलिया के आनुवंशिक सुधार हेतु AICP कार्यक्रम (मेलिया पर AICP के अंतर्गत) घटक: CPTs एवं प्लस वृक्षों के चयन हेतु प्राकृतिक वनों एवं मानव निर्मित रोपणों का सर्वेक्षण स्थिरता, अनुकूलनशीलता एवं उत्पादकता के आकलन हेतु विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों में चयनित जीनोटाइप्स के परीक्षण के लिए बहु-स्थलीय मूल्यांकन परीक्षणों की स्थापना जैव-प्रौद्योगिकी हस्तक्षेपों के अनुप्रयोग हेतु डीएनए आधारित उपकरणों का मानकीकरण तथा उत्पादकता बढ़ाने के लिए मार्कर सहायत चयन को लागू करना

2- उत्पादकता एवं स्थिरता के लिए Gmelina arborea Roxb. क्लोन की स्क्रीनिंग

3- रिमोट सेंसिंग एवं GIS का उपयोग करते हुए अपर असम में वन-बाह्य वृक्षों की फाइटो-विविधता एवं कार्बन भंडार का आकलन

4- Aquilaria malaccensis Lamk. में वर्णनकर्ताओं का विकास एवं कृत्रिम इनोकुलेशन का मूल्यांकन

5- Morinda citrifolia L. (नोनी) – उत्तर-पूर्वी भारत के लोगों के लिए आजीविका का एक विकल्प

6- उत्तर-पूर्वी भारत में Parkia roxburghii G. Don की मृत्यु दर पर अनुसंधान

7- उत्तर-पूर्वी भारत हिमालय क्षेत्र में ऊँचाई प्रवणता के साथ Pinus kesiya के वितरण एवं फीनोलॉजिकल घटनाओं पर क्षेत्रीय स्तर का अध्ययन

8- आनुवंशिक मूल्यांकन के माध्यम से उत्तर-पूर्व भारत के लिए Populus प्रजातियों के उपयुक्त क्लोनों की पहचान

9- बाँस का आनुवंशिक मूल्यांकन, सुधार एवं प्रवर्धन

10- बाँस प्रजातियों की गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री का वाणिज्यिक उत्पादन

11- नागालैंड एवं अपर असम में प्रमुख भूमि उपयोग क्षेत्रों के कार्बन भंडार एवं कार्बन पृथक्करण क्षमता का आकलन

12- नागालैंड की विभिन्न पारंपरिक प्रणालियों में झूम चक्र की अवधि में कमी के संदर्भ में मृदा पोषक तत्व स्थिति एवं उत्पादकता से संबंधित अनुकूलन एवं शमन उपाय

13- असम के दिब्रू-सैखोवा बायोस्फियर रिज़र्व में चयनित पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं एवं मानव कल्याण के साथ उनके अंतर्संबंध का आकलन

14- उत्तर-पूर्वी भारत के चयनित जंगली फलदार पौधों की प्रभावी संरक्षण हेतु नर्सरी तकनीकों का मानकीकरण तथा समावेशी विकास के लिए मूल्य संवर्धित उत्पादों का विकास

15- नागालैंड में विभिन्न भूमि उपयोग प्रणालियों के अंतर्गत मृदा गुणवत्ता एवं कार्बन संचयन में होने वाले परिवर्तनों का अध्ययन

16- मिजोरम, उत्तर-पूर्व भारत में लाइकेन विविधता का आकलन, प्रलेखन एवं विशेषता निर्धारण

17- असम के कार्बी आंगलोंग में स्थानांतरित खेती के अंतर्गत अपक्षयग्रस्त मृदा की उत्पादकता एवं पोषक तत्व स्थिति में वृद्धि हेतु आर्बस्कुलर माइकोराइज़ल फफूंद, फॉस्फेट एवं पोटाश घुलनशील जीवाणुओं का पृथक्करण एवं दक्षता अध्ययन

18- मिजोरम की आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों की नर्सरी रोगों पर अध्ययन एवं उनका प्रबंधन

19- मेघालय के वनों के संदर्भ में आक्रामक प्रजातियों का जैविक नियंत्रण

20- ब्रह्मपुत्र नदी के तटों पर मृदा अपरदन नियंत्रण एवं लोगों की ईंधन लकड़ी की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु असम में Casuarina प्रजातियों का परिचय परीक्षण

21- लघु बाँस नर्सरी की स्थापना

22- एरिकल्चर में उपचारित बाँस उत्पादों का मानकीकरण एवं लोकप्रियकरण

23- अगर (Aquilaria malaccensis Lamk.) पर समन्वित अनुसंधान कार्यक्रम

24- उत्तर-पूर्व भारत में बाँस आनुवंशिक संसाधनों का संरक्षण एवं मूल्यांकन

25- त्रिपुरा की लाइकेन विविधता का आकलन, प्रलेखन एवं विशेषता निर्धारण

26- मिजोरम की दुर्लभ एवं संकटग्रस्त ऑर्किड प्रजातियों का सूक्ष्म-प्रवर्धन एवं उनका प्राकृतिक आवास में पुनःस्थापन

27- नागालैंड के झूम क्षेत्रों में फसल उत्पादकता वृद्धि हेतु देशज पौध वृद्धि प्रोत्साहक राइजोबैक्टीरिया का प्रदर्शन मूल्यांकन

28- रोगजनक तनाव की स्थिति में Cymbopogon winteranius में मेवलोनेट (MVA) मार्ग एवं मिथाइल एरिथ्रिटोल 4-फॉस्फेट (MEP) मार्ग ट्रांसक्रिप्ट्स की अभिव्यक्ति प्रोफाइलिंग

29- मिजोरम में जंगली मशरूम विविधता की खोज एवं उपयोग

30- सुदूर-पूर्वी हिमालय के लिए लैंडस्केप पहल (Hi-LIFE)

31- भारत के Tettigonidae (Orthoptera) का वर्गिकी अध्ययन

32- त्रिपुरा में सागौन कापिस नमूना प्लॉट्स की गणना

33- REDD-प्लस हिमालय: हिमालय में REDD-प्लस के कार्यान्वयन में अनुभव का विकास एवं उपयोग (मिजोरम में पायलट परियोजना)

34- त्रिपुरा के पहाड़ी क्षेत्रों में भूकंप-प्रतिरोधी आवास एवं संरचनाओं के संवर्धन हेतु बाँस उपचार तकनीकों पर क्षमता निर्माण

35- मृदा कार्बन पृथक्करण में वृद्धि हेतु वन नेक्रोमास से बायोचार-संवर्धित सुपरकम्पोस्ट का विकास एवं अनुकूलन

36- मेघालय के खासी एवं गारो पहाड़ियों में Aquilaria malaccensis Lamk. में अगरवुड निर्माण हेतु इनोकुलेशन तकनीक का मानकीकरण



हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान (HFRI), शिमला

ICFRE-PLAN बजट के अंतर्गत:

1- हिमाचल प्रदेश में सिल्वी-पाश्चरल प्रणालियों का सर्वेक्षण एवं मूल्यांकन तथा सामुदायिक आजीविका को बनाए रखने में उनकी भूमिका

2- हिमाचल प्रदेश की लाहौल घाटी में विद्यमान भूमि उपयोग प्रणालियों की कार्बन पृथक्करण क्षमता

3- हिमाचल प्रदेश एवं जम्मू-कश्मीर के शीत मरुस्थलों में Salix की श्रेष्ठ एवं कीट-प्रतिरोधी क्लोनों के चयन, स्क्रीनिंग, पारिस्थितिक आकलन, उनकी खेती, उत्पादन प्रवृत्तियों एवं संरक्षण हेतु पहचान

4- हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला की अल्पाइन चरागाहों में पारिस्थितिक अध्ययन

5- चिर-पाइन वनों में नियंत्रित अग्नि दहन के पौध विविधता एवं मृदा गुणों पर प्रभाव का विश्लेषण

6- हिमाचल प्रदेश के उच्च ऊँचाई वाले संक्रमण क्षेत्रों में वन कीट-कीटों की परिवर्तित स्थिति एवं उनके प्रबंधन पर अध्ययन

7- Cedrus deodarae (Roxb.) G. Don में ग्राफ्टिंग तकनीक का मानकीकरण

8- नर्सरी एवं क्षेत्रीय परिस्थितियों में J. polycarpos C. Koch की कृषि-तकनीकों का मानकीकरण एवं वृद्धि मापदंडों का मूल्यांकन

9- चारा हेतु ओक वनों पर समुदाय की निर्भरता तथा हिमाचल हिमालय की विभिन्न ओक प्रजातियों का पोषण मूल्य एवं पत्ती जैवभार उत्पादन के लिए तुलनात्मक विश्लेषण, जो लॉपिंग, अभिमुखता, ऊँचाई एवं क्राउन संरचना से प्रभावित है

10- उत्तर-पश्चिमी हिमालय की पहाड़ी बाँस प्रजातियों (रिंगाल) का संरक्षण एवं आनुवंशिक सुधार हेतु विशेषता निर्धारण। PI: डॉ. राजेश शर्मा (अगस्त, 2017 – जुलाई, 2020)।

बाह्य सहायता प्राप्त परियोजनाएँ:

1- हिमाचल प्रदेश के जिला किन्नौर के मूरांग वन क्षेत्र में वैज्ञानिक हस्तक्षेप के माध्यम से Pinus gerardiana (चिलगोजा) के संरक्षण हेतु जागरूकता प्रशिक्षण

2- हिमाचल हिमालय के पर्वतीय क्षेत्रों में तकनीकी हस्तक्षेप, नेटवर्किंग तथा समुदाय की बुनियादी आवश्यकताएँ। [हिमालयन रिसर्च ग्रुप (HRG), शिमला के साथ सहयोगात्मक परियोजना]

वित्तपोषण एजेंसी: DST, नई दिल्ली

3- दीर्घकालिक पारिस्थितिक निगरानी हेतु हिमाचल प्रदेश के जिला चंबा स्थित टुंडाह वन्यजीव अभयारण्य में पुष्पीय विविधता का आकलन

वित्तपोषण एजेंसी: CAT योजना के अंतर्गत HPSFD

4- हिमाचल प्रदेश के जिला लाहौल-स्पीति स्थित किब्बर वन्यजीव अभयारण्य में वनस्पति का आकलन

वित्तपोषण एजेंसी: CAT योजना के अंतर्गत HPSFD

5- उत्तर-पश्चिमी हिमाचल हिमालय में पर्वतीय समुदायों के लिए वैकल्पिक आजीविका अवसरों के साथ जलवायु परिवर्तन शमन एवं जैव विविधता संरक्षण हेतु नवोन्मेषी प्रौद्योगिकियाँ। [हिमालयन रिसर्च ग्रुप (HRG), शिमला के साथ सहयोगात्मक परियोजना]

वित्तपोषण एजेंसी: नेशनल मिशन ऑन हिमालयन स्टडीज (NMHS), MoEF & CC, नई दिल्ली

6- Thysanoplusia orichalcea (F.) (Lepidoptera: Noctuidae) का जैविक नियंत्रण: उत्तर-पश्चिमी हिमालय में Saussurea costus का एक संभावित कीट एवं स्थानीय समुदायों तक संरक्षण प्रौद्योगिकी का विस्तार।

वित्तपोषण एजेंसी: NMPB, नई दिल्ली

7- माइकोराइज़ल जैव-प्रौद्योगिकी के माध्यम से Pinus gerardiana का संरक्षण

वित्तपोषण एजेंसी: IERP के अंतर्गत GBPIHED, अल्मोड़ा

8- जम्मू प्रांत (जम्मू एवं कश्मीर), भारत के चिरपाइन वनों में नॉक्ट्यूड पतंगों (Noctuidae: Lepidoptera) की जैव विविधता, आवास संबंध एवं GIS मानचित्रण

वित्तपोषण एजेंसी: IERP के अंतर्गत GBPIHED, अल्मोड़ा

9- हिमाचल प्रदेश में Pinus gerardiana Wall. तथा महत्वपूर्ण जंगली मशरूम पर वैज्ञानिक हस्तक्षेप के माध्यम से आजीविका सृजन में सुधार पर अध्ययन

वित्तपोषण एजेंसी: DST, नई दिल्ली

10- उत्तर-पश्चिमी हिमालय की उच्च मूल्य वाली संकटग्रस्त औषधीय जड़ी-बूटियों हेतु जैवसंश्लेषण मार्गों की व्याख्या तथा जीन मार्कर विकास पर कार्यक्रम सहयोग। [जेयूआईटी वाकनाघाट, सोलन के साथ सहयोगात्मक परियोजना]

वित्तपोषण एजेंसी: DST, नई दिल्ली

11- Valeriana jatamansi Jones तथा Podophyllum hexandrum Royle की उच्च सक्रिय घटक सामग्री वाले पहचाने गए एक्सेशन की आनुवंशिक श्रेष्ठता एवं स्थिरता का बहु-स्थलीय परीक्षणों के माध्यम से मूल्यांकन

वित्तपोषण एजेंसी: NMPB, नई दिल्ली

12- Trillium govanianum Wall. ex. D. Don (नाग छत्री) की नर्सरी एवं प्रवर्धन विधियों का मानकीकरण

वित्तपोषण एजेंसी: NMPB, नई दिल्ली

13- Polygonatum cirrhifolium (Wall) Royle (महामेदा) के सामूहिक प्रवर्धन हेतु नर्सरी तकनीकों का मानकीकरण तथा स्थानीय समुदायों में उसका प्रसार

वित्तपोषण एजेंसी: NMPB, आयुष मंत्रालय



वन उत्पादकता संस्थान, रांची

1- उत्तर बंगाल, ओडिशा की पहाड़ियों एवं भारत के अन्य भागों से Melia dubia जर्मप्लाज्म का संग्रह, संरक्षण एवं मूल्यांकन, ताकि श्रेष्ठ क्लोनों की पहचान एवं विमोचन किया जा सके। [P.I- श्री आदित्य कुमार, वैज्ञानिक- बी, PP – 5 वर्ष (2013 – 2018) एवं बजट प्रावधान - `. 50.00 लाख ]

2- लातेहार जिला में स्थानिक वितरण मॉडलिंग दृष्टिकोण का उपयोग करते हुए Lantana camara का जोखिम आकलन। [PI - डॉ. शरद तिवारी, वैज्ञानिक - एफ; PP- 3 वर्ष (2016 – 2019); बजट - `. 18.98 लाख]

3- बाँस वर्गिकी में Bambusa tulda-longispiculata - nutans-teres कॉम्प्लेक्स के समाधान हेतु सिंगल न्यूक्लियोटाइड पॉलीमॉर्फ़िज़्म (SNP) मार्कर की खोज [PI - डॉ. संजय सिंह, वैज्ञानिक - ई; PP- 4 वर्ष (2016 – 2020); बजट - `. 12.00 लाख]

4- झारखंड एवं पश्चिम बंगाल के ग्रामीण लोगों के बीच Withania somnifera Dunal की उच्च उपज देने वाली किस्मों का क्षेत्रीय मूल्यांकन एवं घरेलूकरण [PI – श्री संजीव कुमार, वैज्ञानिक - डी; PP- 3 वर्ष (2016 – 2019); बजट - `. 10.76 लाख]

5- झारखंड में लाख उत्पादन हेतु उपयोग की जाने वाली Flemingia semialata एवं Flemingia macrophylla का आनुवंशिक मूल्यांकन एवं सुधार [P.I- श्री आदित्य कुमार, वैज्ञानिक - सी, PP – 3 वर्ष (2016 – 2019) एवं बजट प्रावधान - `. 12.62 लाख ]

6- पूर्वी भारत में खाद्य अनुपूरक के रूप में मूल्य संवर्धन हेतु Moringa oleifera की रासायनिक एवं आनुवंशिक विविधता [P.I- श्री पंकज सिंह, RO-I, PP – 3 वर्ष (2016 – 2019) एवं बजट प्रावधान - `. 9.90 लाख ]



वन जैव-विविधता संस्थान, हैदराबाद

आंतरिक परियोजनाएँ

1- आंध्र प्रदेश के पूर्वी घाटों में स्थित नेल्लामल्ला सेशाचलम पहाड़ियों एवं कौंडिन्य वन्यजीव अभयारण्य की महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों के प्राकृतिक पुनर्जनन पर अध्ययन। श्री एम. बी. होन्नुरी (2013-2018)

2- आंध्र प्रदेश के वनों से प्राप्त एथ्नो-कीटनाशक पौधों की जैव-प्रभावकारिता स्थापित करने हेतु स्क्रीनिंग। डॉ. दीपा एम., 3 वर्ष, 2016-2019।

3- आंध्र प्रदेश के Sapindus trifoliatus के लिए समेकित कीट प्रबंधन प्रणाली (IPM) का विकास। डॉ. दीपा एम., 3 वर्ष, जनवरी 2016–दिसंबर 2018

4- आंध्र प्रदेश के नेलापट्टू पक्षी अभयारण्य की आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी में घोंसला बनाने वाले प्रवासी जलपक्षियों की बीट से पोषक तत्वों के भार के प्रभाव। श्री डी. जया प्रसाद, IFS, 3 वर्ष, 2016-2019।

5- Pterocarpus santalinus L.f. में सामूहिक चयन एवं चयनात्मक प्रजनन के माध्यम से उत्पादकता में सुधार। डॉ. एस. पट्टनायक, 5 वर्ष, 2016-2021।

6- Rauwolfia serpentina (L.) Benth. ex Kurz में वृद्धि एवं जैव-रासायनिक तत्वों पर प्राकृतिक बायोस्टिमुलेंट की क्षमता का अध्ययन। श्री पंकज सिंह, 3 वर्ष, 2017-2020।

7- तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश में सागौन के प्रमुख कीटों के विरुद्ध Trichogramma (Hymenoptera: Trichogrammatidae) की स्वदेशी प्रजातियों की पहचान एवं उनका मूल्यांकन। डॉ. दीपा एम., 5 वर्ष, 2017-2022।

8- पूर्वी घाटों से संकटग्रस्त प्रजाति Syzygium alternifolium के लिए पुनरुद्धार कार्यक्रम। डॉ. एस. पट्टनायक, 5 वर्ष, 2017-2022।

बाह्य परियोजनाएँ

1- वनस्पति कार्बन पूल आकलन के अंतर्गत वनस्पति एवं बायोमास मापदंडों का मापन चरण-I डॉ. जी.आर.एस. रेड्डी (2014-2018)

हर्बल गार्डन की स्थापना डॉ. जी.आर.एस. रेड्डी (2015-2018)

तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश के लिए RET प्रजातियों के साथ कृषि-वनीकरण मॉडल का विकास (2015-2019)

कृषि-वनीकरण प्रणाली में धान + बाच (Acorus calamus) वृक्षों एवं मछली पर आधारित गहन जैविक खेती प्रणाली — विकास कार्यक्रम के अंतर्गत एक पायलट शोध। डॉ. जी.आर.एस. रेड्डी, 2016-2017।



लकड़ी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान, बेंगलुरु

1- Melia composita Syn. Melia dubia Cav. की दो विभिन्न आयु की लकड़ी में पहचान, वितरण का पैटर्न, तनाव लकड़ी का अनुपात तथा कुछ भौतिक एवं शारीरिक (एनाटॉमिकल) गुणों का अध्ययन। PI: Dr. M. Sujatha; (2016-2019)

2- पैनल उत्पादों से फॉर्मल्डिहाइड उत्सर्जन में कमी। PI: Dr. Anil Kumar Sethy; (2016-2019)

3- Near Infrared Spectroscopy (NIRS) का उपयोग करते हुए त्वरित एवं गैर-विनाशकारी तकनीक द्वारा महत्वपूर्ण लकड़ी गुणवत्ता मापदंडों का आकलन तथा काष्ठ प्रजातियों की पहचान। PI: Dr. S.R. Shukla; (2016-2019)

4- प्राकृतिक रेशों के विभिन्न प्रकारों के ध्वनिक व्यवहार का अध्ययन तथा ध्वनि अवशोषक सामग्री के रूप में उनके उपयोग की संभावना। PI: Dr. S.K. Sharma; (2016-2019)

5- विभिन्न बाँस प्रजातियों का उपयोग कर बाँस लम्बर का विकास तथा विभिन्न संरचनात्मक अनुप्रयोगों के लिए ठोस लकड़ी लम्बर के विकल्प के रूप में इसके उपयोग की क्षमता का मूल्यांकन। PI: Dr. S.K. Sharma; (2017-2020)

6- उच्च स्तरीय अनुप्रयोगों हेतु उन्नत गुणों वाले नैनो-वुड-कम्पोज़िट (NWC) का निर्माण कर कम घनत्व वाली लकड़ियों का मूल्य संवर्धन। PI: Dr. S.R. Shukla; (2017-2020)

7- Pongamia pinnata (L.) बीज तेल से माइक्रोवेव सहायक प्रत्यक्ष बायोडीज़ल उत्पादन का अध्ययन, द्वि-चरणीय विलायक निष्कर्षण द्वारा। PI: Ritesh D. Ram; (2014-2018)

8- वुड-पॉलिमर कम्पोज़िट का जैविक अपघटन एवं मौसमीय व्यवहार। PI: Dr. Pankaj Aggarwal; (2016-2019)

9- लकड़ी संरक्षक के रूप में नैनो धातु ऑक्साइड्स की प्रभावकारिता। PI: Mrs. D. Venmalar; (2016-2019)

10- नैनोसेलुलोज नेटवर्क युक्त प्राकृतिक रेशा कम्पोज़िट। PI: Dr. Shakti Singh Chauhan; (2017-2019)

11- गर्म तेल उपचार द्वारा लकड़ी संरक्षण की पर्यावरण-अनुकूल विधि। PI: Dr. K.K. Pandey; (2017-2020)

12- ऊष्मीय रूप से संशोधित लकड़ी पर कोटिंग्स का मौसमीय प्रभाव। PI: Dr. K.K. Pandey; (2017-2020)

13- Eucalyptus spp. एवं Lantana camara के अर्कों के ऑर्गेनो-मेटैलिक कॉम्प्लेक्स का विकास तथा अर्ध-जैव संरक्षक के रूप में उसका मूल्यांकन। PI: C.N. Vani; (2017-2019)

14- पश्चिमी घाटों के उच्च ओलियोरेज़िन उत्पादक वन पौधों की स्क्रीनिंग एवं निष्कर्षण विधियों का मानकीकरण। PI: Mr. B.S. Chandra Shekar; (2016-2019)

15- गैस क्रोमैटोग्राफी-मास स्पेक्ट्रोमेट्री (GC-MS) आधारित चंदन तेल का प्रमाणीकरण। PI: Dr. S.S. Bisht; (2016-2018)

16- विभिन्न स्थानों पर उगाई गई Pterocarpus santalinus L.f. (रेड सैंडर्स) लकड़ी में रासायनिक मार्करों का पृथक्करण, पहचान एवं मूल्यांकन। PI: Dr. S.S. Bisht; (2017-2021)

17- नीम आधारित पर्यावरण-अनुकूल संरक्षकों की शेल्फ-लाइफ एवं फिक्सेटिव गुण बढ़ाने की विधियों का अन्वेषण। PI: Mr. B.S. Chandrashekar; (2017-2021)

18- भारतीय मानक ब्यूरो के अनुसार आयातित लकड़ियों की उपचार-क्षमता एवं टिकाऊपन का निर्धारण। Dr. R. Sundararaj; (2012-2018)

19- चंदन की नर्सरियों एवं प्लांटेशन में उभरती एवं पुनः-उभरती रोग समस्याओं की घटना, पूर्वानुमान एवं नियंत्रण। PI: Dr. Muthukumar; (2016-2021)

20- Melia dubia के आनुवंशिक सुधार पर अखिल भारतीय समन्वित परियोजना। Dr. Geeta Joshi; (2012-2022)

21- प्राकृतिक रंग देने वाले पौधों का चयन एवं सुधार। PI: H.C. Sindhuveerendra; (2016-2020)

22- कृषि-वनीकरण एवं ब्लॉक प्लांटेशन में Marihal bamboo (Dendrocalamus stocksii (Munro) M. Kumar, Remesh & Unnikrishnan) तथा Dendrocalamus strictus का प्रबंधन। PI: Dr. Syam Viswanath; Duration: (2017-2019)

23- कर्नाटक एवं गोवा में Aquilaria malaccensis (अगर) का Provenance Cum Progeny परीक्षण की स्थापना एवं मूल्यांकन (चरण-I)। PI: Dr. N. Ravi; Duration: (2017-2022)

24- मूल्यवान काष्ठ प्रजाति Diospyros ebenum J. Koenig ex Retz. का बीजों एवं इन-विट्रो तकनीकों द्वारा प्रवर्धन पर अध्ययन। PI: Mrs. Tresa Hamalton; Duration: (2017-2020)

25- कर्नाटक में चंदन की खेती पर विधि/उदारीकरण नीति (2001) के प्रभावों का अध्ययन। PI: Smt. P.R. Triveni; (2016-2018)

बाह्य रूप से वित्तपोषित परियोजनाएँ

1- आक्रामक वन खरपतवार से ब्रिकेट्स के उत्पादन तथा JFM गाँवों द्वारा उनके उपयोग पर अध्ययन। PI: Mr. Ritesh D. Ram; Funding Agency: KFD (2014-2018)

2- लकड़ी गुणों के लिए QTLs/कैंडिडेट जीन की पहचान एवं टैगिंग – IWST घटक (2016-2019)। PI: Dr. Shakti Singh Chauhan; Funding Agency: DBT

3- गैर-विनाशकारी उपकरणों का उपयोग करते हुए चयनित लकड़ी गुणों में प्राकृतिक विविधता का आकलन तथा Melia dubia के श्रेष्ठ जीनोटाइप्स की पहचान। PI: Dr. Shakti Singh Chauhan; Funding Agency: KFD (2015–March 2018)

4- सेल कल्चर तकनीक का उपयोग करते हुए Nothapodytes nimmoniana से उच्च कैम्प्टोथेसिन निष्कर्षण हेतु प्रोटोकॉल का मानकीकरण। PI: B.S. Chandrashekar; Funding Agency: KFD (2015–March 2018)

5- कोडागु ज़िले के कुछ भागों में Acrocarpus fraxinifolius (Belangi) वृक्षों का समयपूर्व मरना। PI: Dr. A. Muthukumar; Funding Agency: KFD (2014–September 2018)

6- बेंगलुरु शहर एवं आसपास के क्षेत्रों में वृद्ध शहरी वृक्षों से संभावित जोखिम का आकलन। PI: Dr. Muthukumar; Funding Agency: KFD (2014–March 2018)

7- चंदन (Santalum album L.) का संरक्षण, सुधार एवं जैव-संसाधन विकास। PI: Dr. Syam Viswanath; Funding Agency: NMPB (2013–July 2017)

8- बाँस का आनुवंशिक मूल्यांकन, सुधार एवं प्रवर्धन। PI: Dr. Syam Vishwanath; Funding Agency: NBM (2015–2019)

9- हब्भावी, बेलगाम अनुसंधान रेंज में हाई-टेक बाँस नर्सरी एवं जर्मप्लाज़्म बैंक की स्थापना व रख-रखाव हेतु तकनीकी सहयोग। PI: Dr. Syam Viswanath; Funding Agency: KFD (2016–March 2018)

10- BTSG-ICFRE योजना के अंतर्गत IWST में छोटी बाँस नर्सरी की स्थापना। PI: Dr. Syam Viswanath; Funding Agency: BTSG-ICFRE-NABM (Oct 2015–August 2017)

11- पश्चिमी घाटों के आर्द्र सदाबहार वनों की औषधीय एवं आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण RET प्रजातियों का बीज भंडारण, प्रवर्धन एवं प्राकृतिक पुनर्जनन स्थिति के माध्यम से एक्स-सीटू संरक्षण। PI: Dr. Geeta Joshi; Funding Agency: KFD (2015–March 2018)

12- वृक्ष सुधार हेतु उदारीकृत नीति के बाद कर्नाटक में भारतीय चंदन (Santalum album) की स्थिति का पुनर्मूल्यांकन (चरण-I)। PI: Dr. Arun Kumar; Funding Agency: KFD (2015–March 2018)

13- सांस्कृतिक क्रियाओं का उपयोग कर Tectona grandis, Tamarindus indica तथा Syzigium cumini के क्लोनल सीड ऑर्चर्ड्स में बीज उत्पादकता बढ़ाना। PI: Dr. Ashuthosh Srivastava; Funding Agency: KFD (2015–April 2018)

14- कर्नाटक की तीन महत्वपूर्ण काष्ठ प्रजातियों के लिए DNA आधारित पहचान प्रणाली का विकास। PI: Dr. Ashuthosh Srivastava; Funding Agency: KFD (2014–2018)

15- Embelia ribes (Burm. f.) एवं अन्य महत्वपूर्ण संकटग्रस्त औषधीय पौधों के लिए क्वासी इन-सीटू संरक्षण एवं प्राकृतिक क्षेत्रों का पुनर्भरण। PI: Dr. Ashuthosh Srivastava; Funding Agency: NMPB (2013–September 2017)

16- Aquillaria malaccensis के लिए व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य इंडक्शन सिस्टम का विकास तथा कर्नाटक के आर्द्र उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अगरवुड उत्पादन का प्रबंधन। PI: Dr. Ashuthosh Srivastava; Funding Agency: NMPB (2014–July 2017)

17- ग्रामीण-शहरी इंटरफेस पर स्थान-कालिक भूमि उपयोग पैटर्न तथा हरित क्षेत्रों और जैव-भौतिक विशेषताओं के बीच संबंध (2017–2020)। PI: Dr. B.N. Diwakar; Funding Agency: DBT; Indo-German Collaboration

18- वनीकरण (सिल्वीकल्चरल) प्रथाओं का उपयोग कर Pongamia pinnata L. प्लांटेशनों की बीज उत्पादकता बढ़ाना। PI: B.N. Diwakara; Funding Agency: KFD (2015–2018)

19- कर्नाटक में Pongamia pinnata (L.) Pierre के प्रदर्शन का आकलन एवं बहु-स्थलीय परीक्षण की स्थापना; किस्म विमोचन की दिशा में एक कदम। PI: B.N. Diwakara; Funding Agency: KFD (2014–2018)

20- कर्नाटक में गैर-काष्ठ वन उपज (NTFP) पर डेटाबेस का विकास। PI: V. Soundarrajan; Funding Agency: KFD (2015–March 2018)



वन अनुसंधान एवं मानव संसाधन विकास केंद्र, छिंदवाड़ा

1- मध्य प्रदेश की कुछ सामाजिक-आर्थिक रूप से महत्वपूर्ण प्रजातियों के लिए मानक प्रबंधन तकनीकों एवं मूल्य संवर्धित उत्पादों के विकास हेतु एकीकृत दृष्टिकोण।

2- सतपुड़ा कृषि-जलवायु क्षेत्र की जैव-विविधता, विशेष रूप से जनजातीय समुदायों की निर्भरता के संदर्भ में।

3- Moringa oleifera (सहजन/ड्रमस्टिक) की पत्तियों से समृद्ध फास्ट-फूड उत्पादों का विकास तथा ग्रामीण महिलाओं के लिए कौशल उन्नयन प्रशिक्षण।



सामाजिक वानिकी एवं इको-पुनर्वास केंद्र (CSFER), प्रयागराज

1- पूर्वी उत्तर प्रदेश के कृषि-जलवायु क्षेत्रों में लवण-प्रभावित भूमि के पुनर्वास हेतु स्वदेशी वृक्ष प्रजातियों का मूल्यांकन (2017-2020)। PI: आलोक यादव, वैज्ञानिक-D। वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

2- उत्तराखंड एवं उत्तर प्रदेश की अवनत भूमि पर Gmelina arborea तथा Emblica officinalis आधारित कृषि-वानिकी मॉडल का विकास (FRI, देहरादून की आंशिक परियोजना) (2017-22)। PI: अनुभा श्रीवास्तव, वैज्ञानिक-C। वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

3- पूर्वी उत्तर प्रदेश में कृषि-वानिकी को बढ़ावा देने हेतु Eucalyptus के उपयुक्त क्लोनों का आकलन (2016-21)। PI: अनुभा श्रीवास्तव, वैज्ञानिक-C। वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

4- पूर्वी उत्तर प्रदेश में पॉपलर आधारित कृषि-वानिकी (2017-2020)। PI: अनीता तोमर, वैज्ञानिक-E। वित्तपोषक एजेंसी: UPCST

5- विकास एवं सततता के लिए उत्तर प्रदेश के पूर्वी मैदानी क्षेत्र में कृषि-वानिकी प्रौद्योगिकियों का परिचय (2018-21)। PI: अनुभा श्रीवास्तव, वैज्ञानिक-C। वित्तपोषक एजेंसी: UPCST

6- कॉपिस्ड सामग्री के लकड़ी गुणों के आकलन हेतु उच्च घनत्व रोपण प्रबंधन (FRI, देहरादून की आंशिक परियोजना) (2018-21)। PI: अनीता तोमर, वैज्ञानिक-E। वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE

7- Melia composita Wild. के आनुवंशिक सुधार हेतु अखिल भारतीय समन्वित परियोजना (2018-22)। PI: डॉ. कुमुद दुबे। वित्तपोषक एजेंसी: ICFRE



वन-आधारित आजीविका एवं विस्तार केंद्र (CFLE), अगरतला

1- त्रिपुरा में सागौन (Teak) कॉपिस नमूना प्लॉट्स का गणना/आंकलन (2016-17 से आगे)

2- TRIBAC के सहयोग से त्रिपुरा के पहाड़ी क्षेत्रों में भूकंप-प्रतिरोधी आवास एवं संरचनाओं को बढ़ावा देने हेतु बांस उपचार तकनीकों पर क्षमता निर्माण (2016-17 से आगे)

3- उत्तर-पूर्व भारत में बांस आनुवंशिक संसाधनों का संरक्षण एवं मूल्यांकन (RFRI–CFLE परियोजना, 2017-18 से आगे)

त्रिपुरा, उत्तर-पूर्व भारत की लाइकेन विविधता का आकलन, प्रलेखन एवं विशेषण (ARCBR–CFLE परियोजना, 2017-18 से आगे)

अंतिम बार समीक्षा और अद्यतन की तिथि: 10 Feb 2026

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